कहानियां

भेडि़या और बाँसुरी

एक भेडि़या था। एक बार वह भेड़ों के झुंड़ से एक मेमने को उठा लाया। उसे लेकर वह जंगल की ओर जा रहा था कि मेमने ने कहा,” भेडि़ए चाचा, मैं जानता हूँ कि आप मुझे खा जाओगे। पर मुझे खाने से पहले क्या आप मेरी आखिरी इच्छा पूरी करोगे?“

क्या है तेरी आखिरी इच्छा? भेडि़ए ने पूछा।

मेमने ने कहा, चाचा, मुझे पता है, आप बाँसुरी बहुत अच्छी बजाते हो। मुझे बाँसुरी की धुन बहुत अच्छी लगती है। इसलिए मुझे मारने के पहले कृपा करके बाँसुरी की धुन तो सुना दो!

भेडि़या बैठ गया और उसने बाँसुरी बजाना शुरु कर दिया। थोडी़ देर के बाद जब भेडि़ए ने बाँसुरी बजाना बंद किया तो मेमने ने उसकी तारीफ करते हुए कहा, वाह! वाह! बहुत सुंदर! चाचा आप तो उस गड़रिए से भी अच्छी बाँसुरी बजाते हो। इतनी सुरीली बाँसुरी कोई भी नहीं बजा सकता। चाचा, एक बार फिर बजाओ न!

मेमने की बातें सुनकर भेडि़या फूलकर कुप्पा हो गया। इस बार वह और जोश में आकर पहले की अपेक्षा ज्यादा ऊँचे सुर में बाँसुरी बजाने लगा।

इस बार बाँसुरी के स्वर गड़रिए और उसके शिकारी कुत्तों के कानों में पड़े। गड़रिया अपने शिकारी कुत्तों के साथ दौड़ता हुआ वहाँ आ पहुँचा। शिकारी कुत्तों नें भेडि़ए को धर दबोचा और उसका काम तमाम कर दिया। मेंमना भागता हुआ भेड़ों के झुंड़ में जा मिला।

शिक्षा -धीरज और सूझबूझ से ही हम संकट को पार कर सकते हैं।