व्याकरण

सर्वनाम
सर्वनाम
जो शव्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किये जाते है उन्हें सर्वनाम कहते है। जैंसे मैं, तुम, वह, उनको, उसका आदि।
आओ, सर्वनाम पहचानेः-
1. रोली एक टीचर है।
2. वह बच्चों को पढ़ाती है।
3. उसको घर का काम भी पसन्द है।
4. लड़के खेलते है।
5. उनके हाथों में हाकी है।
उक्त वाक्यों में रोली और लड़के संज्ञा के स्थान पर क्रमशः वह, उसको य उनके शव्दों का प्रयोग सर्वनाम हैं।
सर्वनाम के भेद:
1. पुरूषवाचक मैं/हम, तू/तुम/आप, वह/वे
2. निश्चयवाचक यह, वह
3. अनिश्चयवाचक कोई, कुछ
4. संबंधवाचक जो, सेा
5. प्रश्नवाचक कौन, क्या, किसको
6. निजवाचक स्वयं, अपने-आप, अपना
परिभाषा:
1. पुरूषवाचक - जो सर्वनाम बोलने वाले, सुनने वाले या किसी भी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग किये जाते हैं, उन्हें पूरूषवाचक सर्वनाम कहते हैं जैसे - मैं, तुम, वह, आदि
पुरूषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं -
प्रथम पुरूष, - मैं , हम
मघ्यम पुरूष - तू, तुम, आप
अन्य पुरूष - वह, वे
2. निश्चयवाचक - जब किसी वस्तु या व्यक्ति की ओर पूरे निश्चय के साथ संकेत किया जाय तो उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे ,
निकट की वस्तु या व्यक्ति के लिए यह नितिन का घर है
दूर की वस्तु के लिए - वह नीरज का स्कूल है।
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम से किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति का बोध नहीं होता। जैसे - कोई या कुछ । उदाहरणार्थ - नदी के उस पार कोई है या वह कुछ तोड़ रहा है।
4. संबंधवाचक सर्वनाम - दो बातों या चीजों के बीच संबंध बताते है या वे सर्वनाम जो दो बातों के बीच संबंधों को जोड़ते हैं, जैसे जो मेहनत करेगा वह सफल होगा - जो और वह दो बातों में संबंध पैदा करते हैं। पुनः जब वह आ गया तब गाड़ी चली - जब और तब दो बातों को जोड़ते हैं।
5. प्रश्नवाचक सर्वनाम - किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में जानने, समझने या पूंछनेके लिए प्रयोग होते हैं, जैसे कि -
कौन खेल रहा हैे?
कैसे खेल रहा है?
कब से खेल रहा है?
क्यों खेल रहा है?
क्या खेल रहा है?
6. निजवाचक सर्वनाम - का प्रयोग अपने खुद या स्वयं के लिए किया जाता है, जैसे कि -
मैं स्वयं यह कार्य कर लूंगा।
वह अपने-आप सब कुछ संभाल लेगा।
वह आप ही पेड़ पर चढ़ गई।
वह अपने काम में लगा है।
सर्वनाम और परसर्ग
संज्ञा की तरह, कारक सर्वनाम के साथ भी जुड़ते हैं और जब सर्वनाम के साथ जुड़ते हैं, तब उनके रूप में कुछ परिवर्तन कर देते हैं। सर्वनामों में संबोधनकारक नहीं होता, इसलिए आठ की जगह सात कारकों के रूप ही बनते हैं।
नीचे दी गई तालिकाओं से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी
प्रथम पुरूष /उत्तम पुरूष “मै” की रूप रचना
कारक
एकबचन
बहुबचन
कर्ता
मैं, मैंने
हम, हमने
कर्म
मुझे, मुझको
हमें, हमको
करण
मुझसे, मेरे द्वारा
हमसे, हमारे द्वारा
संप्रदान
मुझे, मेरे लिए, मुझको
हमें,. हमको, हमारे लिए
अपादान
मुझसे
हमसे
संबंध
मेरा, मेरी, मेरे
हमारा, हमारी, हमारे
अधिकरण
मुझमें, मुझपर
हममें, हमपर

मध्यम पुरूष “तू” की रूप रचना
कारक
एकबचन
बहुबचन
कर्ता
तू, तूने
तुम, तुमने
कर्म
तुझे, तुझको
तुम्हे, तुमको
करण
तुझसे, तेरे द्वारा
तुमसे, तुम्हारे द्वारा
संप्रदान
तेरे लिए
तुम्हारे लिए
अपादान
तुझसे
तुमसे
संबंध
तेरा, तेरी, तेरे
तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे
अधिकरण
तुझमे, तुझपर
तुममें, तुमपर
अन्य पुरूष “वह” की रूप रचना
कारक
एकबचन
बहुबचन
कर्ता
वह, उसने
वे, उन्होंने
कर्म
उसे, उसको
उन्हें, उनको
करण
उससे, उसके द्वारा
उनसे, उनके द्वारा
संप्रदान
उसे, उसके लिए
उनको, उन्हें, उनके लिए
अपादान
उससे
उनसे
संबंध
उसका, उसकी, उसके
उनका, उनकी, उनके
अधिकरण
उसमें, उस पर
उनमें
“यह” की रूप रचना
कारक
एकबचन
बहुबचन
कर्ता
यह, इसने
ये, इन्होंने
कर्म
इसे, इसको
इन्हें, इनको
करण
इससे, इसके द्वारा
इनसे, इनके द्वारा
संप्रदान
इसे, इसको, इसके लिए
इन्हें, इनको, इनके लिए
अपादान
इससे
इनसे
संबंध
इसका, इसकी, इसके
इनका, इनकी, इनके
अधिकरण
इसमें, इस पर
इनमें,
अभ्यास
1. सर्वनाम के भेदों के नाम और उदाहरण दें।
2. खाली स्थान भरें:
............................. बीमार है।
........................... छत पर हैं।
.............................. नीचे बुलाओ।
.................................हो तुम? जो इतना शोर मचा रहे हो।
................................कहां गए हैं।
3. सर्वनामों के प्रकार वाक्यों के सामने लिखिएः
क - मैं स्वयं चला जाउंगा। ...............................
ख - वह रमेश का घर है। ....................................
ग - नीचे बुलाओ। .......................................
घ - जो जैसा बोएगा, वैसा काटेगा। ........................