कहानियां

लोमड़ी और सारस

एक सारस की एक लोमड़ी से मित्रता हो गई। एक बार लोमड़ी ने सारस को भोजन का निमंत्रण दिया। उसने सूप (रसा) तैयार किया और उसे दो सपाट तश्तरियों में परोस दिया।

चलो, खाने की शुरूआत करें। लोमड़ी ने सारस से कहा और सूप चाटना शुरू कर दिया। बड़ा मजेदार है। है न! सूप चाटते-चाटते वह बोली।

सारस ने सूप की सुगंध ली। उसके मुँह में पानी आ गया। पर सूप की एक बूंद भी उसके मुँह तक नहीं पहुँची उसकी चोंच लंबी थी और तश्तरी सपाट थी। उसे पता चल गया कि धूर्त लोमड़ी उसके साथ मजाक कर रही है। लेकिन सारस चुप रहा। वह देखता रहा लोमड़ी सूप चट कर गई।

कुछ दिनों के बाद सारस ने लोमड़ी को भोजन का निमंत्रण दिया। वह लोमड़ी को अपने यहाँ ले गया। उसने भी स्वादिष्ट सूप बनाया। सँकरे मुँहवाली दो सुराहियों में सूप परोसकर सारस ने कहा- चलो, शुरू करें खाना। उसने अपनी लंबी चोच सुराही में डाल दी। सारस आराम से सूप पी रहा था। सूप पीते-पीते उसने लोमड़ी से कहा, मैंने इतना स्वादिष्ट सूप कभी नही चखा था। इसे मैंने विशेष रूप से तुम्हारे लिए बनाया है। शर्म मत करो, जी भर कर खाओ।

पर लोमड़ी सूप का जरा भी स्वाद नहीं ले पाई। सुराही का गला बहुत तंग था। सूप तक उसका मुँह पहुँच ही नहीं पाया। उसे बडा दुःख हुआ।

लोमड़ी समझ गई की उसने सारस के साथ जो शरारत की थी, उसी का यह फल उसे भुगतना पड़ रहा है।

शिक्षा -जैसे को तैसा