hindi ki bindi

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हलवाई

hindi poem
हलवाई की यही दुकान,
यहाँ मिलें मीठे पकवान।
गोल जलेबी और इमरती,
मुँह के अंदर पानी भरती।
बऱफी खाओ या रसगुल्ला,
खाकर करना है कुल्ला।
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